Jun 22, 2010

Day 58: सिर्फ तुम्हारे लिए ....

आज अभी सोचा मैंने
क्या लिख रही हू
और क्या सोच रही हू,

तभी ख़याल आया
क्यों न लिखू तुम्हे,
मेरे ही हो तुम
भाग्य हो तुम
और सब कुछ ही तो हो.

किस नाम से पुकारू तुम्हे
हसना-रोना भी तुम,
मुस्कान-आँसू भी तुम,
मंजिल-मुश्किले भी तुम,
पाना-खोना भी तुम,
जब सब कुछ तुम तो क्या सोचू
और क्या कहू,

चलो, आज से तुम्हारा ही रूप लिखूंगी
तुम्हे ही सजाऊँगी अपने शब्दों मे
....मेरी जिंदगी......

4 comments:

  1. Wah! kya baat hai!!
    "Zindagi hai to khaawb hai...
    Vishwaas hai to jeet hai".(for the rest which i presume u know chk out my latest which has these at the start.
    Admire ur artistic template too.
    What a coincidence.Loved this one and will go through more.
    Happy to meet you here.:)

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  2. Thanks Shivani. I liked your post. I will keep following your blog. Comments are welcome here too!
    Good luck.
    By the way, you have a beautiful name.

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  3. Thanks for visiting my blog and appreciating this poem, Shoonyakonn.

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